ऐसे थे आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी
दौलतपुर रायबरेली
४ फरवरी २८
श्री पंडित ठाकुर प्रसाद तिवारी को नमस्कार
आपकी लड़की गिरजा ने यहाँ राधादेवी से बहुत कहा था कि वह कहीं गणेशप्रसाद की शादी लगा दे। तब से वह इस फिक्र में बराबर रही। उसने अपने पिता पंडित कालिकाप्रसाद दुबे को भी इस विषय में पत्र लिखा था। उन्होंने बड़ी कृपा करके अपने सगे भाई पं॰ रघुबरदयाल दुबे की पोती के साथ गणेश की शादी करा देने का विचार किया है। ये लोग जैराजमऊ के दुबे (मेरी ही तरह) उपमन्यु गोत्री हैं। रहने वाले जिले हरदोई में बिलग्राम नाम के मशहूर कस्बे के हैं। पं॰ रघुबर दयाल यहीं अपने मकान में रहते हैं और वकालत करते हैं।
रघुबरदयाल की पोती की उम्र कोई १६ साल की है। हाथ पैर नाक कान से दुरुस्त है। तंदरुस्त है हिन्दी पढ़ी हुई है। नाम काश्मीरो है। ये लोग बड़े सज्जन हैं। चूंकि आप इस तरफ शादी ब्याह करते आये हैं इस कारण इससे अच्छा सम्बन्ध मिलना कठिन है। आपका जी चाहे तो फौरन मंजूर कर लीजिये। अपनी वह फटी हुई ज्योतिष की पोथी खोलकर न बैठ जाना। ऐसे विचार में कुछ सार नहीं है। न मैंने कभी ऐसे विचार किये न पंडित कालिकाप्रसाद ने किये। अच्छा सम्बन्ध बड़े भाग्य से मिलता है। अगर बिलग्राम से कोई चिट्ठी आपके पास आई हो तो उसके जवाब में फौरन अपनी मंजूरी लिख भेजना और यह लिख देना कि जो कुछ पंडित कालिकाप्रसाद देंगे या दिला देंगे वह आप धन्यवादपूर्वक स्वीकार कर लेंगे। किसी तरह की अप्रसन्नता न प्रकट करेंगे। चिट्ठी का जवाब गणेशप्रसाद से लिखाओ। चिट्ठी आपकी तरफ से हो, लिखे वो क्योंकि वे अच्छी हिन्दी लिख सकते हैं आपकी लिखावट शायद अच्छी तरह न पढ़ी जाय। अगर बिलग्राम से चिट्ठी न आवे तो आप मेरी इस चिट्ठी का हवाला देकर अपनी मंजूरी पंडित कालिकाप्रसाद दुबे को लिख भेजना। उनका पता है- राधास्वामी सत्संग चौक गंगादास इलाहाबाद....
अगर आप शादी मंजूर कर लेंगे तो मैं पंडित कालिकाप्रसाद को लिख दूँगा कि शुरू की रस्मों में आपको यह दिया जाय
(१) बरिक्षा (वरदीक्षा) १)
(२) वरदीक्षा पर व्यवहार १५)
(३) नकद ११)
(४) थाल के काम ५)
(५) थाल मलमल के काम ८)
(६) हल्दी सुपारी चन्दन के काम ५)
(७) ब्राह्मणों की दक्षिणा के काम ५)
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५०) यह सब मनीआर्डर से भेजा जाएगा।
आप चाहें बिलासपुर से बारात लावें चाहे किसुनपुर से ले जाय रेल के किराये के मद्दे आपको ५०) दिये जायंगे। यह ५०) हो सकेगा तो ऊपर के ५०) के साथ ही भेज दिये जायंगे। नहीं बिलग्राम में दे दिये जायंगे। बारात में १५ आदमी से अधिक न जाय। ८-१० भले आदमी, बाकी नौकर चाकर परजा। विवाह में जो कुछ आपके भाग्य में होगा मिलेगा। शादी जल्दी ही करनी होगी। निवेदक म॰ प्र॰ द्विवेदी।
राष्ट्र-भाषा के इस शिल्पी ने 21 दिसम्बर 1939 को महाप्रयाण किया। उनकी तपस्या ने हिन्दी साहित्य का जो गौरव बढ़ाया उसे देखते हुए वे अजर-अमर हो गए।
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1 Comments:
1939 ग़लती से 1639 हो गया है. एक जिज्ञासा, ये विवाह हुआ या नहीं
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